कर्ण रोग वात, पित्त और कफ के असंतुलन से होते हैं। कान बहना (कर्णस्राव) मुख्यता कफ विकार है जबकि कम सुनाई देना (बाधिर्य) वात दोष के कारण नसों के सूखने से होता है।
What to look for
कान से मवाद, पानी या खून आना
सुनाई देने की क्षमता में अचानक या धीरे-धीरे कमी
कान में दर्द या भनभनाहट (Tinnitus)
कान के पर्दे में छेद होना
Underlying Triggers
कान में गंदा पानी या बाहरी संक्रमण
बार-बार सर्दी, जुकाम और साइनस की समस्या
कान को तीखी चीजों से साफ करना
तेज आवाज या शोर में लगातार रहना
कान की सफाई के साथ-साथ कर्ण-पूरण (औषधीय तेल का कानों में डालना) और नस्य कर्म चिकित्सा दी जाती है। दशमूल तैल, बिल्व तैल आदि से नसों को बल देकर श्रवण शक्ति वापस लाई जाती है।